लखनऊ-21 जुलाई 2023-किसानों के हित तथा उनके मांग पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के 137 ग्रामों में प्रथम चक्र एवं द्वितीय चक्र की चकबंदी कराये जाने की अनुमति प्रदान कर देने से किसानों में खुशी की लहर देखी जा रही। इस कार्य से जहां किसानों के लिए चकरोड, खलिहान, चारागाह इत्यादि के लिए भूमि उपलब्ध होगी वहीं गाँवों के विकास के लिए भी भूमि उपलब्ध होने से खेल मैदान, स्कूल, आवादी के लिए भूमि सहित गांव के विकास की अन्य योजनाओं के लिए भी भूमि उपलब्ध हो जायेगी। ज्ञातव्य हो मुख्य मंत्री के पास राजस्व विभाग भी है। फलस्वरूप उनकी व्यस्तता के कारण कभी समय से प्रदेश के बरेली, बस्ती, बदांयू, बलरामपुर, कानपुर देहात, मुरादाबाद, बिजनौर, रायबरेली, रामपुर, संतकबीरनगर, सहारनपुर, सोनभद्र, देवरिया,वाराणासी, जौनपुर, गौड़ा के 52 ग्रामों के किसानों की मांग पर धारा 4(2) क के अंतर्गत प्रथम चक्र की चकबंदी प्रक्रिया में सम्मलित करने की अनुमति प्रदान कर दी है। वहीं धारा 4 क (2) के अंतर्गत द्वितीय चरण की चकबंदी प्रक्रिया के लिए प्रयागराज, बरेली,बस्ती, बुलंदशहर, मऊ, मथुरा, मैनपुरी, सिद्धार्थ नगर, प्रताप गढ, शाहजहांपुर, सुल्तानपुर, देवरिया, जौनपुर, अंबेडकर नगर, अमरोहा, अलीगढ़, गोंडा, गोरखपुर, गाजीपुर, सोनभद्र उक्त जनपदों की विभिन्न तहसील, ब्लाकों के 85 ग्रामों के लंबित चकबंदी प्रस्ताव पर द्वितीय चरण की चकबंदी प्रक्रिया प्रारंभ करने की भी अनुमति दे दी है। मुख्य मंत्री की अनुमति मिलते ही राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री सुधीर गर्ग द्वारा शासनादेश संख्या - 1/351674/एक-8-2023-रा0-8/1-8099/42 दिनांक 17 जुलाई 2023 को जारी कर दिया।शासन के इस आदेश के क्रम में उत्तर प्रदेश चकबंदी आयुक्त श्री प्रभु एन सिंह द्वारा अब यथाशीघ्र संबंधित जिलों के जिलाधिकारी/ जिला चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी को प्रथम चरण एवं द्वितीय चरण की चकबंदी प्रक्रिया प्रारंभ करने के आदेश निर्गत कर दिए जायेगें। सत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि चकबंदी आयुक्त कार्यालय में लंबित पड़े लगभग 800 सौ प्रस्ताव को उनकी कमियों को सुधार कर मा मुख्य मंत्री की स्वीकृत के लिए भेजने की तैयारी आयुक्त कार्यालय में शुरु हो गई है। प्रदेश के गाँव के विकास के लिए यदि लंबित प्रस्ताव की स्वीकृत मिल जाती है तो गाँव का तो विकास होगा ही साथ ही मृत पड़े चकबंदी विभाग का भी कायाकल्प होना शुरु हो जायेगा।
Savitri Devi
Friday, July 21, 2023
विद्युतकर्मी उपभोक्ताओं की समस्याओं का गम्भीरता से करें समाधान-ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा
लखनऊ-प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने कहा कि वर्तमान में भीषण गर्मी एवं उमस के कारण प्रदेश में बिजली की मांग में एक बार फिर से ऐतिहासिक रूप से बढ़ोत्तरी हुई है। इस समय 27557 मेगावाट की बढ़ी हुई मांग हेतु उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति सकुशल पूरी की जा रही है। आने वाले समय में भी ऊर्जा विभाग प्रदेश की विद्युत मांग को सकुशल पूरा करने का पूरा प्रयास करेगा। उन्होंने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि विद्युत के उपयोग में सावधानी बरतें और विद्युत संरक्षण के लिए भी आगे आएं। उन्होंने सभी विद्युत कर्मियों को निर्देश दिये हैं कि उपभोक्ताओं को पर्याप्त, निर्बाध और सुरक्षित बिजली देने के लिए अपने कर्तव्य को निष्ठापूर्वक करते रहें।ऊर्जा मंत्री ने विद्युत कर्मियों को निर्देशित किया है कि विद्युत मांग के बढ़ने से फाल्ट और व्यवधान की समस्याएं बढ़ जाती हैं। ट्रांसफार्मर के जलने की सम्भावना बनी रहती है। अधिक लोड होने से विद्युत तार भी टूटकर गिरते हैं। कहीं-कहीं पर आंधी, तूफान और बरसात के कारण तथा पेड़ों के टूटने से भी विद्युत आपूर्ति में व्यवधान पड़ता है। इस दौरान उपभोक्ताओं को विद्युत व्यवधान का सामना न करना पड़े इसके लिए फाल्ट एवं आपूर्ति सम्बंधी गड़बड़ियोें को शीघ्र ठीक करें। उपभोक्ताओं द्वारा की गयी शिकायतों को भी गम्भीरता से सुनें और उसका तत्काल समाधान भी कराएं।
ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि विद्युत दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भी कई बार सचेत किया गया है कि जहां कहीं पर भी पोल, बाक्सों, स्टे वायर, ट्रांसफार्मर और उसकी जाली में विद्युत करंट आ रहा हो, उसको भी चेक करें और लोगों को ऐसे उपकरणों से दूर रहने के लिए भी जागरूक करें जिससे कि लोगों को जन-धन हानि से बचाया जा सके। उन्होंने जर्जर तारों व पोल को बदलने के कार्यों में गति लाने व ओवरलोड हो रहे ट्रांसफार्मर को नियमित रूप से चेक करने के निर्देश दिये जिससे कि विद्युत आपूर्ति में कोई बाधा न आये। उन्होंने सख्त निर्देश दिये हैं कि निर्धारित शिड्यूल के अनुरूप सभी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाय, इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई एवं लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी।
Monday, May 8, 2023
नगरीय क्षेत्र में बसें परिवारों को भूमि का मालिकाना अधिकार दिया जाना जनहित में राज्यपाल को पत्र प्रेषित-सावित्री देवी
नगरीय क्षेत्र में बसें परिवारों को भूमि का मालिकाना अधिकार दिया जाना जनहित में राज्यपाल को पत्र प्रेषित-सावित्री देवी
सोनभद्र। केंद्र सरकार द्वारा गांव के लोगों को भी शहर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के मकसद से ग्रामीण क्षेत्रों में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन्हीं योजनाओं में से एक पीएम स्वामित्व योजना भी है। इस योजना के तहत गांव के उन लोगों को अपने घर की जमीन का मालिकाना हक दिया जाता है जो किसी भी सरकारी आंकड़े में दर्ज नहीं है दरअसल देश के ग्रामीण क्षेत्रों में काफी ऐसे लोग हैं जिनकी घर की जमीन किसी भी सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं है व कुछ लोगों की आबादी हैं जिससे उनकी जमीन पर किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा कब्जा होने का खतरा हमेशा बना रहता है इसके अलावा इस जमीन पर लोन भी नहीं मिल पाता है। इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना की शुरुआत किया गया है। पीएम स्वामित्व योजना एक केंद्रीय योजना है। जिसे 24 अप्रैल 2020 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर मा०प्रधानमंत्री मोदी जी ने शुरू किया था। स्वामित्व योजना का उद्देश्य गांव में बसे हुए ग्रामीण परिवारों के मालिकों को "अधिकारों के रिकॉर्ड / संपत्ति कार्ड प्रदान करना है। इस योजना में विविध पहलुओं को शामिल किया गया है. इनमें संपत्तियों के मुद्रीकरण को सुगम बनाना और बैंक ऋणों को सक्षम बनानाय संपत्ति संबंधी विवादों को कम करना व्यापक ग्राम स्तरीय योजना शामिल हैं। यह पंचायतों के सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइल को और बढ़ाएगा, जिससे वे आत्मनिर्भर बनेंगे. इस योजना में कमजोर समूहों सहित समाज के प्रत्येक वर्ग को शामिल किया गया।महिला सुरक्षा एवं जन सेवा ट्रस्ट की अध्यक्ष सावित्री देवी ने राज्यपाल उत्तर प्रदेश लखनऊ व प्रधानमंत्री भारत सरकार को प्रार्थना पत्र प्रेषित कर यह मांग किया की जनपद सोनभद्र के ज्यादातर नगर निकायों में वर्षों से बसें परिवार दरसल शहरी क्षेत्रों में काफी ऐसे लोग है जिनकी घर की जमीन किसी भी सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं है कुछ लोगों की भूमि आबादी दर्ज भी है जिसके आधार पर ज्यादातर लोगों को केन्द्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया व जिसका ज्यादातर लोग अपना गृह कर व जल कर भी जमा करते है परन्तु वर्तमान समय में दर्ज आबादी व अन्य भूमि में निवास कर रहे लोगो के पास कोई सरकारी कागज नहीं होता है इस प्रकार की भूमि पर लोग अपने कब्जे के आधार पर रह रहे है हमेशा निवासरत लोगों को भू-माफियों से डर बना रहता है उन लोगों को घर बनवाने में बैंक व्दारा लोन नही मिल पाता है प्रधानमंत्री जी की महत्वकांक्षी योजना स्वामित्व योजना के अंतर्गत आबादी का सर्वे कराके आबादी अधिकार अभिलेख तैयार करते हुये वर्षों से कब्जे के आधार पर जांच कराकर भूमि का मालिकाना हक़ खतौनी देने हेतु विचार किया जाये जिससे निवासरत लोगों को इसका लाभ मिलेगा व किसी से भी विवाद नहीं होगा।अगर सरकार ने इस प्रकरण को संज्ञान में ले लिया तो अगामी 2024 में इसका लाभ मिलेगा।
Wednesday, April 15, 2020
पुलिस, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता अभियान से जुड़े कर्मियों पर हमला एक अक्षम्य अपराध
स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर्स व कर्मी, सभी सफाई अभियान से जुड़े अधिकारी/कर्मचारी, सुरक्षा में लगे सभी पुलिस अधिकारी व पुलिस विभाग के कर्मी इस आपदा की घड़ी में दिन रात सेवा कार्य में जुटे हैं।
मुरादाबाद में पुलिस, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता अभियान से जुड़े कर्मियों पर हमला एक अक्षम्य अपराध है, जिसकी घोर निंदा की जाती है।
ऐसे दोषी व्यक्तियों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम तथा राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे दोषी व्यक्तियों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम तथा राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की जाएगी।
दोषियों द्वारा की गई राजकीय संपत्ति के नुकसान की भरपाई उनसे सख्ती से की जाएगी।
जिला पुलिस प्रशासन ऐसे उपद्रवी तत्वों को तत्काल चिन्हित करे और प्रत्येक नागरिक को सुरक्षा के साथ ही उपद्रवी तत्वों पर पूरी सख्ती भी करें।
जिला पुलिस प्रशासन ऐसे उपद्रवी तत्वों को तत्काल चिन्हित करे और प्रत्येक नागरिक को सुरक्षा के साथ ही उपद्रवी तत्वों पर पूरी सख्ती भी करें।
Friday, April 27, 2018
फ्लोराइड युक्त पानी पीने को विवश नेरुइयादामर के ग्रामीण*2006 में स्थापित फ्लोराइड रिमूवल संयंत्र 2008 से ही बन्द
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कोन(सोनभद्र)चोपन ब्लॉक के ग्राम पंचायत कचनरवा का नेरुइयायादामर व रोहिनवादामर टोले के लोग फ्लोराइड युक्त दूषित पानी पीने को विवश है।दूषित पानी पीने के कारण यहाँ के लोग कम उम्र में ही बूढ़े दिखाई देने लगे हैं, अधिकांश लोगों के दांत पीले हो गए हैं तथा लोगों के शरीर के जोड़ो में हमेशा दर्द बना रहता है।स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस गांव में कभी कभी कैम्प लगाकर लोगों के स्वास्थ्य के देखरेख की औपचारिकता भी की जाती है लेकिन स्थानीय लोगों को इस कैम्प का कोई विशेष लाभ नही मिल पाता,क्योकि बीमारी के मूल कारण दूषित पेय जल का कोई समुचित उपाय नही किया जा सका है।सन 2006 में इस बस्ती में सोलर फोटोवोल्टिफ फ्लोराइड रिमूवल संयंत्र की स्थापना उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा किया गया था इसी सयंत्र से पूरे गांव में पाइप लाइन से शुद्ध पेय जल की आपूर्ति की जाती थी,जगह जगह पर करीब 15 की संख्या में नल बनाये गए थे ,शुद्ध पेय जल मिलने के कारण उस दौरान लोगों के स्वास्थ्य में सुधार भी हो रहा था,परन्तु ग्रामीणों की माने तो इस सयंत्र में लगे सोलर पैनल 2008 में चोरी हो गए जिससे शुद्ध पेय जल की आपूर्ति बंद हो गई जो आज तक चालू नही हो सकी।इसके अलावा सोलर सिस्टम पर ही आधारित एक और मिनी संयंत्र बस्ती के बीच मे लगा था,सोलर एनर्जी से सबमरसिबल पम्प से पानी निकलता था जिसे फ्लोराइड रिमूवल प्लांट द्वारा शुद्ध कर लोगों को उपलब्ध कराया जाता था लेकिन इसमे लगा सबमरसिबल पंप भी वर्षो से खराब हो चुका है लेकिन इसकी भी सुधि लेने वाला कोई नही है।इसके अलावा गांव के प्रत्येक हैंडपम्प में भी फ्लोराइड रिमूवल यंत्र लगाया गया था लेकिन वर्तमान में हैंडपम्पो में लगा एक भी फ्लोराइड रिमूवल यंत्र क्रियाशील नही है।देखा जाय तो सरकारी उपेक्षा के कारण यहाँ के लोग फ्लोराइड युक्त पीने के लिए मजबूर हैं।
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इनसेट
इनसेट
असमय ही बूढ़े दिख रहें हैं लोग
नेरुइयादामर टोले के सरयू पुत्र स्व महादेव व उनकी पत्नी बासो देवी जो अपनी उम्र क्रमश 50 वर्ष व 45 वर्ष बताते हैं, लेकिन उन्हें देखकर कोई भी 80-85 वर्ष ही अंदाजा लगाएगा।सरयू व उनकी पत्नी के जोड़ो में हर समय दर्द बना रहता है,कैम्प में मिली दवाइयों का भी इनके स्वास्थ्य पर कोई असर नही पड़ा,तो इनका ट्रक ड्राइवर पुत्र अपने कमाई से वाराणसी के किसी निजी अस्पताल में इलाज करा रहा है,सरयू का कहना है कि जिंदगी मौत से भी बदतर हो गयी है और ऐसा कहते हुए उनके आंखों से आंसुओ की धारा बहने लगती है।इस गांव में ऐसे कई लोग हैं जो तिल तिल कर मौत की ओर बढ़ने को विवश हैं लेकिन सरकारी मशीनरी का ध्यान समस्या के मूल कारण दूषित पेय जल की ओर नही जा रहा है।
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