फ्लोराइड युक्त पानी पीने को विवश नेरुइयादामर के ग्रामीण*2006 में स्थापित फ्लोराइड रिमूवल संयंत्र 2008 से ही बन्द
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कोन(सोनभद्र)चोपन ब्लॉक के ग्राम पंचायत कचनरवा का नेरुइयायादामर व रोहिनवादामर टोले के लोग फ्लोराइड युक्त दूषित पानी पीने को विवश है।दूषित पानी पीने के कारण यहाँ के लोग कम उम्र में ही बूढ़े दिखाई देने लगे हैं, अधिकांश लोगों के दांत पीले हो गए हैं तथा लोगों के शरीर के जोड़ो में हमेशा दर्द बना रहता है।स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस गांव में कभी कभी कैम्प लगाकर लोगों के स्वास्थ्य के देखरेख की औपचारिकता भी की जाती है लेकिन स्थानीय लोगों को इस कैम्प का कोई विशेष लाभ नही मिल पाता,क्योकि बीमारी के मूल कारण दूषित पेय जल का कोई समुचित उपाय नही किया जा सका है।सन 2006 में इस बस्ती में सोलर फोटोवोल्टिफ फ्लोराइड रिमूवल संयंत्र की स्थापना उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा किया गया था इसी सयंत्र से पूरे गांव में पाइप लाइन से शुद्ध पेय जल की आपूर्ति की जाती थी,जगह जगह पर करीब 15 की संख्या में नल बनाये गए थे ,शुद्ध पेय जल मिलने के कारण उस दौरान लोगों के स्वास्थ्य में सुधार भी हो रहा था,परन्तु ग्रामीणों की माने तो इस सयंत्र में लगे सोलर पैनल 2008 में चोरी हो गए जिससे शुद्ध पेय जल की आपूर्ति बंद हो गई जो आज तक चालू नही हो सकी।इसके अलावा सोलर सिस्टम पर ही आधारित एक और मिनी संयंत्र बस्ती के बीच मे लगा था,सोलर एनर्जी से सबमरसिबल पम्प से पानी निकलता था जिसे फ्लोराइड रिमूवल प्लांट द्वारा शुद्ध कर लोगों को उपलब्ध कराया जाता था लेकिन इसमे लगा सबमरसिबल पंप भी वर्षो से खराब हो चुका है लेकिन इसकी भी सुधि लेने वाला कोई नही है।इसके अलावा गांव के प्रत्येक हैंडपम्प में भी फ्लोराइड रिमूवल यंत्र लगाया गया था लेकिन वर्तमान में हैंडपम्पो में लगा एक भी फ्लोराइड रिमूवल यंत्र क्रियाशील नही है।देखा जाय तो सरकारी उपेक्षा के कारण यहाँ के लोग फ्लोराइड युक्त पीने के लिए मजबूर हैं।
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इनसेट
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असमय ही बूढ़े दिख रहें हैं लोग
नेरुइयादामर टोले के सरयू पुत्र स्व महादेव व उनकी पत्नी बासो देवी जो अपनी उम्र क्रमश 50 वर्ष व 45 वर्ष बताते हैं, लेकिन उन्हें देखकर कोई भी 80-85 वर्ष ही अंदाजा लगाएगा।सरयू व उनकी पत्नी के जोड़ो में हर समय दर्द बना रहता है,कैम्प में मिली दवाइयों का भी इनके स्वास्थ्य पर कोई असर नही पड़ा,तो इनका ट्रक ड्राइवर पुत्र अपने कमाई से वाराणसी के किसी निजी अस्पताल में इलाज करा रहा है,सरयू का कहना है कि जिंदगी मौत से भी बदतर हो गयी है और ऐसा कहते हुए उनके आंखों से आंसुओ की धारा बहने लगती है।इस गांव में ऐसे कई लोग हैं जो तिल तिल कर मौत की ओर बढ़ने को विवश हैं लेकिन सरकारी मशीनरी का ध्यान समस्या के मूल कारण दूषित पेय जल की ओर नही जा रहा है।





